जापान में शिंज़ो आबे मोदी के लिए पलक-पांवड़े क्यों बिछा देते हैं
इस दौरे के ज़रिए मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे से मधुर संबंध विकसित करने की कोशिश की थी. मोदी और आबे के बीच की गर्मजोशी कई मौक़ों पर दिखी. हालांकि अहम मुद्दा यह है कि दोनों की गर्मजोशी से क्या कुछ ठोस हासिल हुआ है? एशिया-प्रशांत में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को लेकर दोनों देश चिंतित हैं और यही चिंता दोनों देशों को क़रीब लाती है. अमरीकी राष्ट्रपति डोन्लड ट्रंप को लेकर बढ़ रही अनिश्चितता के कारण भी दोनों देशों के लिए साथ आना अहम है. हालांकि ट्रंप चीन के कथित विस्तारवाद को लेकर काफ़ी आक्रामक हैं. भारत और जापान के बीच बढ़ते सहयोग को दोनों देशों की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता से भी जोड़ा जाता है. आबे हिन्द महासागर और प्रशांत में काफ़ी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. भारत और जापान दोनों एक- दूसरे के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. मोदी सरकार भी एक्ट ईस्ट एशिया पॉलिसी के तहत दक्षिणी-पूर्वी एशिया और पूर्वी एशिया से संबंधों को मज़बूत करना चाहता है. जापान को लेकर भरोसे का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ़ उसे ही भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश की अनु...